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Nov 21st
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कुशल पाल सिंह

‘‘पूर्ण प्रतिबद्धता एवं मेहनत के साथ सही दिशा में प्रयास करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करें’’

सि.स.क्रॉनिकल : सिविल सेवा में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई।
कुशल पाल सिंह : जी, आपका धन्यवाद।
सि.स.क्रॉनिकल : आपके वैकल्पिक विषय क्या थे? इनके चयन का आधार क्या था?
कुशल पाल सिंह : हिन्दी साहित्य और लोक प्रशासन। हिन्दी साहित्य मैंने स्नातक स्तर तक पढ़ा है। मानविकी का विद्यार्थी होने के कारण हमेशा लोक प्रशासन से जुड़ाव रहा है, इसके अतिरिक्त दोनों विषयों में रुचि होना एवं इनका अंकदायी होना इसके कारण है। यद्यपि हिन्दी साहित्य में संवाद आईएएस के कुमार अजेय सर के मार्गदर्शन के कारण लोक प्रशासन की तुलना में अधिक अंक प्राप्त हुए। मेरी सफलता में हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सि.स.क्रॉनिकल : वैकल्पिक विषयों एवं सामान्य अध्ययन के लिए कौन से पुस्तक, पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने हैं और कौन से छोड़ने हैं, इसका निर्धारण आपने कैसे किया?
कुशल पाल सिंह : पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं के चयन में अपने मित्रों एवं पूर्व चयनित अभ्यार्थियों का सहयोग प्राप्त किया, परंतु निर्णय स्वयं किया कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है।
सि.स.क्रॉनिकल : प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनायी?
कुशल पाल सिंह : इसके लिए सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल के अतिरिक्त वार्षिकी का अध्ययन किया। योजना, कुरूक्षेत्र, फ्रंटलाइन एवं हिन्दी के महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी टॉपिकों का अलग करके उनका अध्ययन किया।
सि.स.क्रॉनिकल : नेगेटिव मार्किंग को पॉजिटिव बनाने के लिए आप सिविल सेवा परीक्षा के प्रत्याशियों को क्या सुझाव देना चाहेगंे?
कुशल पाल सिंह : नेगेटिव मार्किंग में अनावश्यक न घबराएं। केवल कुशल अनुमान का ही प्रयोग करें। जिस प्रश्न में संपूर्ण जानकारी न हो उसका प्रयास न करें।
सि.स.क्रॉनिकल : क्या आपने नोट्स बनाया? नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इस नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनायी?
कुशल पाल सिंह : हां, मुख्य परीक्षा के लिए मैंने दोनों वैकल्पिक विषयों के नोट्स तैयार किए, जिनका निश्चित रूप से मुझे फायदा रहा। अंतिम समय में दोहराने में अधिक कठिनाई नहीं हुई। कोचिंग संस्थान के नोट्स भी छात्रों के लिए लाभकारी होते हैं, परंतु संभव हो सकें तो छात्र को इन्हें अद्यतन और अपनी सुविधानुसार संक्षिप्त कर लेना चाहिए।
सि.स.क्रॉनिकल : क्या आपने किसी विषय की कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रहे?
कुशल पाल सिंह : हां, मैंने ‘हिंदी साहित्य’ और ‘साक्षात्कार’ के लिए, संवाद आई.ए.एस. के कुमार अजय सर का मार्गदर्शन प्राप्त किया। यह ‘अजय सर’ का ही प्रयास था कि मैं अपने प्रथम साक्षात्कार में ही सफल रहा जिसके लिए मैं सदैव उनका आभारी रहूंगा। संवाद आईएएस में व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान दिया जाना आजीवन स्मरणीय रहेगा। हिंदी साहित्य के लिए संस्थान के कक्षा नोट्स एवं मूल रचना के अलावा कुछ नहीं पढ़ा।
सि.स.क्रॉनिकल : वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, आप क्या सुझाव देंगे?
कुशल पाल सिंह : ऐसे शिक्षक का चुनाव करें जो आप की प्रतिभा का विकास करने एवं कमियों को सुधारने में सहायक हो। इसलिए जरूरी है कि शिक्षक का चुनाव उसकी क्षमता के आधार पर करें न कि विज्ञापन के आधार पर।
सि.स.क्रॉनिकल : परीक्षा के तीनों चरणों, (प्रारम्भिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में तैयारी की रणनीति आपकी एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
कुशल पाल सिंह : प्रारंभिक परीक्षा के प्रथम प्रश्न-पत्र के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम का समग्र अध्ययन किया। तथ्यों एवं आंकड़ों पर विशेष ध्यान दिया, द्वितीय प्रश्न-पत्र के लिए सभी संबंधित पक्षों के अभ्यास विशेषकर कम्प्रीहेंशन पर बल दिया। मुख्य परीक्षा के लिए नोट्स बनाए तथा समय पर प्रश्न-पत्र समाप्त करने पर ध्यान दिया। छद्म साक्षात्कार के अभ्यास में ‘अजेय सर’ का अमूल्य योगदान रहा।
सिं.स.क्रॉनिकल : सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?
कुशल पाल सिंह : मेरा मानना है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी स्नातक स्तर से ही शुरू कर देनी चाहिए, ताकि वांछित परिणाम शीघ्र प्राप्त किया जा सके।
सि.स.क्रॉनिकल : सामान्य धाराणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रचना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रख रखा था?
कुशल पाल सिंह : सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में कैरियर विकल्प का चुनाव सुरक्षित माना जाता है। मैं लगभग 6 वर्ष से भारतीय खाद्य निगम में प्रबंधक (डिपो) के पद पर कार्यरत हूं। अतः वैकल्पिक कैरियर की उपस्थिति ने मुझे असुरक्षा महसूस नहीं होने दी।
सि.स.क्रॉनिकल : परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं?
कुशल पाल सिंह : यदि उचित रणनीति एवं मेहनत से प्रयास किया जाय तो 1 से 2 वर्ष पर्याप्त है।
सि.स.क्रॉनिकल : परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में आपने क्या कोई विशेष रणनीति अपनायी?
कुशल पाल सिंह : चूंकि इस वर्ष से प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट लागू हुआ तो इस संबंध में छात्रों में सीसैट के स्वरूप को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना रहा, इसके लिए मैंने यूपीएससी द्वारा उपलब्ध कराए गए मॉडल पेपर को ध्यान में रखते हुए समग्र पाठ्यक्रम का अध्ययन करके उसका अभ्यास किया। मुख्य परीक्षा के लिए संस्थान के नोट्स के साथ-साथ महत्वपूर्ण का अध्ययन किया, स्वयं से संक्षिप्त नोट्स तैयार किए तथा समय प्रबंधन का ध्यान रखा।
सि.स.क्रॉनिकल : आपने निबंध की तैयारी कैसे की ओर परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनायी?
कुशल पाल सिंह : निबंध हेतु कोचिंग संस्थान में टेस्ट दिया तथा कक्षाएं ली। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लेखों से सहायता मिली। परीक्षा भवन में सर्वाधिक उपर्युक्त टॉपिक का चयन करके उस पर बिंदुवार फ्रेंमिंग तैयार की, तत्पश्चात् निबंध लिखा।
सि.स.क्रॉनिकल : उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाय?
कुशल पाल सिंह : लेखन-शैली के पूछे गए प्रश्न के अनुकूल शब्द सीमा एवं समय-सीमा का ध्यान रखते हुए विभिन्न तथ्यों का संतुलित समावेश करते हुए उत्तर लिखना चाहिए। इसके लिए मैंने अभ्यास को महत्व दिया। टेस्ट के बाद विस्तृत परिचर्चा एवं मॉडल उत्तर लाभकारी रहा।
सि.स.क्रॉनिकल : मुख्य परीक्षा में प्रश्नोत्तर के दौरान किन पहलुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
कुशल पाल सिंह : मुख्य परीक्षा में प्रश्नोत्तर के दौरान शब्द सीमा एवं समय का अवश्य ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त उत्तर में मुख्य पक्ष पर बल हो तथा समसामयिक प्रासंगिकता के अनुकूल हो।
सि.स.क्रॉनिकल : माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
कुशल पाल सिंह : मेरा मानना है कि माध्यम की अपेक्षा छात्र की क्षमता एवं योग्यता अधिक महत्वपूर्ण होती है। इतना अवश्य है कि अंग्रेजी भाषा में उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री अधिक उपलब्ध है, परंतु हिंदी माध्यम के छात्र भी वांछित परिणाम दे सकते हैं।
सि.स.क्रॉनिकल : आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की?
कुशल पाल सिंह : साक्षात्कार की तैयारी के लिए मैंने अपने बायोडाटा एवं समसामयिकी से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया, छद्म साक्षात्कार एवं मित्रों से परिचर्चा के माध्यम से संभावित प्रश्नों के उत्कृष्ट उत्तर तैयार किए।
सि.स.क्रॉनिकल : आपका साक्षात्कार किसके बोर्ड में था एवं कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए?
कुशल पाल सिंह : मेरा साक्षात्कार 2 अप्रैल को माननीय श्री आई.एम.जी. खान के बोर्ड में था। बोर्ड का रवैया सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण था, अधिकांश प्रश्नों का केन्द्र बिंदु मेरा वर्तमान पद, भारतीय खाद्य निगम तथा खाद्य सुरक्षा अधिनियम रहा। इसके अतिरिक्त कुछ प्रश्न समसामयिकी एवं भारत सरकार की योजनाओं से भी पूछे गए। बोर्ड द्वारा ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया जो नर्वस कर सकता था, यद्यपि बोर्ड द्वारा एक रोचक प्रश्न अवश्य पूछा गया कि यदि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बंद कर दिया जाए तो भारतीय खाद्य निगम की क्या आवश्यकता है?
सि.स.क्रॉनिकल : जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उनको आप क्या सुझाव देंगे?
कुशल पाल सिंह : ऐसे छात्रों को मेरा सुझाव है कि वे पूर्ण प्रतिबद्धता एवं मेहनत के साथ सही दिशा में प्रयास करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, अफवाहों में समय नष्ट न करें।
सि.स.क्रॉनिकल : क्या आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किसी प्रकार योगदान किया?
कुशल पाल सिंह : मैं शहरी पृष्ठभूमि से संबंधित हूं जिसका स्वाभाविक रूप से मुझे लाभ प्राप्त हुआ।
सि.स.क्रॉनिकल : परीक्षा के पाठ््यक्रम एवं प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों में जिस तरह से बदलाव हो रहे है उसके दृष्टिकोण में रखते हुए आप छात्रों को क्या सुझाव देना चाहेंगे?
कुशल पाल सिंह : छात्र सीसैट सकारात्मक सोच के साथ ले। नेगेटिव मार्किंग को लेकर घबराए नहीं बल्कि इसे सफलता का माध्यम बनाए, परीक्षा पाठ्यक्रम के समग्र तार्किक अध्ययन के साथ अभ्यास को महत्व देते हुए रचनात्मक चिंतन पर बल दें।
सि.स.क्रॉनिकल : यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर कोई छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हों, तो ऐसे छात्रों को क्या करना चाहिए?
कुशल पाल सिंह : ऐसे छात्रों को मेरी सलाह है कि वह किसी भी नकारात्मक दृष्टिकोण से मुक्त रहे, स्वयं पर विश्वास करते हुए धैर्य एवं लगन के साथ तैयारी करनी चाहिए।
सि.स.क्रॉनिकल : आप भावी छात्रों को क्या एवं कैसा सुझाव देना चाहेंगे? अपने अनुभव भी बताएं?
कुशल पाल सिंह : सर्वप्रथम मन में आत्मविश्वास जगाएं, क्षमताओं का सही प्रयोग करें तथा मेहनत में ईमानदार बने, असफलता से न घबराएं, बल्कि प्रेरणा के रूप में ले, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है-

‘‘ दुख शोक जो आ पड़े
धैर्यपूर्वक सब सहो।
होगी सफलता क्यों नहीं।
कर्तव्य पथ पर दृढ़ रहो’’

सि.स.क्रॉनिकल : आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
कुशल पाल सिंह : निस्संदेह ईश्वर, माता-पिता एवं पत्नी को तथा संवाद आईएएस के कुमार ‘अजेय सर’ को जिन्होंने बड़े भाई की तरह हिन्दी साहित्य, निबंध एवं साक्षात्कार तक मार्गदर्शन किया।
सि.स.क्रॉनिकल : साक्षात्कार देने के लिए धन्यवाद।
कुशल पाल सिंह : आपका भी धन्यवाद।

 
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