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May 23rd
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संघर्षरत सीरिया में शान्ति की संभावना

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा रूस सहित विश्व की प्रमुख शक्तियों ने म्युनिख में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें गृहयुद्ध से जूझ रहे सीरिया में एक सप्ताह के भीतर युद्ध की समाप्ति का राजनैतिक समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की गई। पिछले कई सालों से दुनिया सीरिया को एक ऐसे भूराजनीतिक युद्ध के मैदान की तरह देखती आ रही है जिसमें कई देश प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से अपने हितों को अधिकतम करने के लिए लड़ रहे हैं। 2011 से ही आपसी हितों का अखाड़ा बने सीरिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 4 लाख 70 हजार लोग मारे गए तथा 19 लाख लोग घायल हुए हंै।।

लगभग 45 प्रतिशत लोगों को सीरिया मे विस्थापन का दंश झेलना पड़ा है वहीं वहां के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा दर भी गिरकर पिछले 5 सालों में 70 से 55.4 पर पहुंच गई है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि मात्र 23 लाख की जनसंख्या वाले देश में इस प्रकार की स्थिति का उत्पन्न होना निश्चित तौर पर अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की असफलता का सूचक है।

म्युनिख समझौते का सकारात्मक पक्ष यह रहा कि रूस तथा अमेरिका दोनों ही युद्ध की समाप्ति के लिए कार्य करने को तैयार हो गए। रूस, सीरिया के राष्ट्रपति बसर अल असद् का पक्ष लेता रहा है वहीं अमेरिका तथा उसके साथी देश सऊदी अरब तथा तुर्की शासन के विद्रोहियों का समर्थन करते आ रहे हैं।

यह स्पष्ट हो चुका है कि दोनों समूहों ने सीरिया में शान्ति की स्थापना के लिए अलग-अलग प्रस्ताव पेश किए हैं। रूस असद् सरकार को यथास्थिति बनाए रखने का पक्षधर है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका व उसके साथी असद् सरकार का जाना ही सीरिया के लिए उचित समझते हैं। मास्को तथा वाशिंगटन दोनों ही इस्लामिक स्टेट से लड़ रहे हैं अतः अमेरिका पिछले कुछ समय से कट्टरपंथी इस्लामिक ताकतों के साथ कुछ विनम्र हुआ है वहीं दूसरी और रूस समस्या का राजनैतिक समाधान तलाश रहा है। सीरिया में संघर्ष विशाल के कार्यान्वित होने के उपरान्त भी रूस के मदद की वजह से असद् सरकार विद्रोहियों की तुलना में अधिक ठोस आधार पर खड़ी हैं। सऊदी अरब तथा तुर्की ने सीरिया में अपनी सेनाएं भेजने की बात कही है पर अगर वे ऐसा करते हैंै तो रूस भी अपनी सेनाएं भेजने से हिचकेगा नहीं तथा यह स्थिति क्षेत्रीय शान्ति के लिए घातक होगी। अन्य प्रश्न यह है कि क्या असद् सरकार सैन्य बल से दुबारा सम्पूर्ण क्षेत्र में सत्ता कायम करने में सफल होगी? जैसा की असद ने हाल ही में कसम खाते हुए कहा है, परन्तु संक्षेप में सीरिया की समस्या को सैन्य हल के रूप में देखना एक भ्रान्ति होगी। अतः उम्मीद की जानी चाहिए कि म्युनिख समझौते को वास्तविकता के धरातल पर लाने के लिए अमेरिका तथा रूस अपने साथियों पर शान्तिपूर्ण वात्र्ता के द्वारा सीरिया का हल निकालने के लिए दबाव डालेंगे।