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बजट में ढांचागत सुधार की प्रतीक्षा में आरबीआई

भारतीय रिवर्ज बैंक ने लोगों की उम्मीदों के अनुसार अपनी दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। आरबीआई ने बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात(CRR)को स्थिर रखने का फैसला लिया है। यद्यपि आरबीआई ने बाजार में तरलता बनाएं रखने के लिए चलनिधि समायोजन सुविधा ;स्।थ्द्ध को चुना है। इस प्रकार केन्द्रीय बैंक ने रेपो रट को भी 6.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला लिया है। इसका प्रमुख कारक 2015-2016 की तीसरी तिमाही में विकास दर की धीमी गति तथा पहले अपनाई गई सख्त तरलता नीतियों को माना जा रहा है।

सार रूप में केन्द्रीय बैंक अगले कुछ महीनों में पारित होने वाले केन्द्रीय बजट की राह देख रहा है जिसमें लगभग 1 माह पश्चात् देश की संसद में भारतीय वित्त मंत्री द्वारा देश की आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा जाएगा। इसी कारण हाल ही में हुई एक प्रेस कान्फ्रेंस में डा. राजन ने यह बताया की देश का केन्द्रीय बैंक सरकार के वार्षिक वित्तिय आकलन का इंतजार कर रहा है, ताकि आरबीआई केन्द्र सरकार द्वारा की जाने वाली विकास की योजनाओं की घोषणओं को देखते हुए राष्ट्र के आर्थिक विकास तथा निम्न मुद्रास्फिति के पक्ष मंें अपनी दरों पर विचार कर सके। तिमाही वार्षिक समीक्षा में बोलते हुए रघुराम राजन ने कहा की पैट्रोल तथा डीजल को छोड़कर उपभोक्ता मुद्रास्फीति निरन्तर स्थिर बनी हुई है। परन्तु बजट के पश्चात् भी मुद्रास्फीति को यही निरन्तर निम्नदरों दर बनाएं रखना निश्चित रूप से डा. रघुराम राजन के लिए एक दुष्कर कार्य होगा।


राजन ने कहा है कि काफी हद तक मुद्रास्फीति को काबु में कर लिया गया है जिसके मार्च 2017 तक और 5 अंक गिरने की उम्मीद है। यद्यपि हमें यह नहीं भुलना चाहिए की सरकार ने हाल ही में सातवें आयोग की रिपोर्ट प्राप्त की है जिसे वह एक साल की अन्दर लागू करने की मंशा रखती है। अतः आरबीआई तथा सरकार दोनों के लिए भविष्य में बढ़ने वाली सम्भावित मुद्रास्फीति से निपटना जहाज में लंगर डालने की तरह कठिन कार्य होगा।


आरबीआई ने कहा की उम्मीदानुसार मध्यावधि में आर्थिक विकास की गति मध्यम थी। बहुत सारे लोगों का ये भी कहना है कि, उच्च संवृद्धि दर तथा निवेश की दर ब्याज दरों पर निर्भर करंेगी। यद्यपि रिजर्व बैंक का तर्क है कि देश के सतत् विकास तथा गरीब तबको के हित में संतुलित ब्याज दरंे सरकार व केन्द्रीय बैंक दोनों की प्राथमिकताएं रहेगी। हाल ही में रघुराम राजन ने कहा है कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पम्प प्राइमिंग का सहारा लेना राजकोषीय समेकन को अस्थिर करने तथा बाधा पहुंचाने वाला कदम होगा। अतः स्पष्ट है कि अब आर्थिक विकास व मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की गेंद सरकार के पाले में है। राजन ने अपने बयान में ढांचागत सुधारों की पैरवी करते हुए यह भी कहा की बजट में खर्चों को नियंत्रित करते हुए विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी। अतः यह माना जा सकता है की सरकार अगामी बजट में अपने खर्चों पर लगाम लगाते हुए ढांचागत सुधारों के सम्बन्ध में कुछ कठोर एवं दीर्घकालिक घोषणाएं करेगी। साथ ही निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुछ क्षेत्रों में और अधिक विनिवेश की घोषणा से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।