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कोयला आवंटन नीति-शक्ति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 17 मई, 2017 को थर्मल पावर सेक्टर के लिए कोयला लिंकेज नीति शक्ति (Coal Linkage Policy - SHAKTI) को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी।

शक्ति का शाब्दिक अर्थ है- स्कीम फाॅर हारनेंसिंग एंड एलोकेटिंग आॅफ कोयला ट्रांसपेरेंटली इन इंडिया (Scheme for Harnessing and Allocating of Koyala (Coal) Transparently in India) शक्ति नामक इस कोयला योजना का उद्देश्य भारत में कोयला आवंटन को पारदर्शी बनाना है शक्ति योजना का उद्देश्य बिजली परियोजनाओं के लिए कोयला आवंटन की नौकरशाही और अक्सर गैर-पारदर्शी प्रक्रिया में सुधार करना है। इसका लक्ष्य ऊर्जा कंपनियों को लंबी अवधि के कोयला संबंधों की नीलामी करना है।

वर्तमान प्रणाली के तहत, एक स्वतंत्र बिजली उत्पादक (Independent Power Producer - IPP) को कोयला आधारित पावर प्लांट स्थापित करने हेतु कोयला लिंकेज के लिए विद्युत मंत्रालय से अनुरोध करना होता है।

मंत्रालय अपनी सिफारिशों के साथ एक स्थायी समिति के अनुरोध को अग्रेषित करता है जो क्वांटम और अवधि के साथ अनुरोध को स्वीकृति देने पर फैसला करता है। जबकि शक्ति योजना विवेकाधीन तत्वों को दूर करने और स्वतंत्रा बिजली उत्पादक के लिए बाजार आधरित मूल्य निर्धरण पेश करने का प्रस्ताव है।

इस योजना से देश के 30,000 मेगावाट बिजली संयंत्रों को पुनर्जीवित होने की संभावना है जो ईंधन आपूर्ति की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे विद्युत उत्पादक जो पहले से ही बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) से प्रतिबद्ध है उनके लिए टैरिफ पर छूट के आधार पर कोयले की आपूर्ति के लिए बोली लगाई जाएगी।

इस नीति का लक्ष्य कोयला आयात पर सरकार की निर्भरता कम करना है ज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्षों में देश में कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई है इससे विद्युत संयंत्रों द्वारा आयातित कोयले की खरीद बंद होने की सम्भावना है। कोल इंडिया कंपनी का उत्पादन वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2.9 प्रतिशत बढ़ा है इसमें केरल 1.6% की बढ़ोतरी हुई।

 
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