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भारतीय छात्र ने बनाया विश्व का सबसे छोटा सैटेलाइट

भारत के 18 वर्षीय छात्र ‘रिफत शारूक’ (Rifath Sharook) ने दुनिया के सबसे छोटे और सबसे हल्के उपग्रह का निर्माण किया है। 64 ग्राम वजनी इस कृत्रिम उपग्रह को जून 2017 में अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा।

यह सैटेलाइट ‘नासा’ तथा ‘आई डूडल लर्निंग’ (I Doodle Learning) द्वारा आयोजित ‘क्यूब्स इन स्पेस’ नामक प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया।

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर इस उपग्रह को ‘कलामसैट’ (KalamSat) नाम दिया गया। इस उपग्रह को 21 जून, 2017 को अमेरिका में वर्जिनिया स्थित वैलप्स द्वीपसमूह (Wallops Island) से एसआर-4 राॅकेट के जरिए नासा द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा। इस सैटेलाइट को चार घंटे के उप कक्षा मिशन (Sub-orbit Mission) पर भेजा जाएगा। इस दौरान ये हल्का सैटेलाइट अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के वातावरण में 12 मिनट तक रहेगा। यह उपग्रह सुदृढ़ कार्बन फाइबर पाॅलीमर (Re-inforced Carbon Fibre Polymer) से निर्मित है। रिफत के अनुसार कलामसैट के निर्माण से उनका उद्देश्य थ्री-डी प्रिंटर कार्बन फायबर के निष्पादन को प्रदर्शित करना था। उनके अनुसार सैटेलाइट डिजाइन करते समय मुख्य चुनौती सबसे हल्की सामग्री का चयन करने की थी।

इस सैटेलाईट में एक नए प्रकार के आॅन-बोर्ड कंप्यूटर का प्रयोग किया गया है तथा इसमें स्वदेश विकसित 8 सेंसर भी लगाए गए हैं जो पृथ्वी के घूर्णन, त्वरण व मैग्नेटोस्फीयर को मापने का कार्य करेंगे।

तमिलनाडु के पल्लापट्टðी निवासी रिफत शारूक चेन्नई की संस्था ‘स्पेस किड्स इंडिया’ से सम्बंधित हैं, इसी संस्था द्वारा उनके प्रयोग का वित्त पोषण भी किया गया। रिफत ‘नासा किड्स क्लब’ के भी सदस्य हैं।

 
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