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भारत का पहला पुस्तक गांव

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने 4 मई, 2017 को सतारा जिले के भीलर (Bhilar) गांव में भारत के पहले ‘पुस्तक गांव’ (Village of Books) का उद्घाटन किया।

मराठी भाषा की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने एवं उनके दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से पुस्तक गांव का विचार लाया गया। इस गांव का उद्देश्य समृद्ध मराठी साहित्य संग्रह के साथ-साथ स्थानीय साहित्य के प्रेमियों के लिए एकमात्र स्थान उपलब्ध कराना है।

भीलर गांव पहाड़ी स्टेशन शहर महाबलेश्वर के निकट स्थित है। गांव को एक साहित्यिक लिबास देने के लिए लगभग 75 कलाकारों ने मंदिर, घरों और दीवारों पर चित्रकारी और साहित्यिक छवियां उकेरी है। भीलर के स्कूलों और सामुदायिक हाॅलों की दीवारों को संत तुकाराम और गंगाधर तिलक जैसे राष्ट्रीय नेताओं के चित्रों से सजाया गया है।

पुस्तक गांव में मराठी साहित्य की 15,000 दुर्लभ पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। किताबों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए पाठकों से नाममात्र शुल्क लिया जाएगा।

भौगोलिक रूप से भीलर पुस्तक गांव की अवधारणा पुस्तक प्रेमियों (Bibliophiles) के वेल्श स्थित बाजार शहर हे-आॅन-वे (Hay-on-Wye) पर आधारित है। विदित हो कि हे-आॅन-वे पुरानी और पुरातात्त्विक पुस्तकों का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है।

5000 की आबादी वाला भीलर पुस्तक गांव सह्याद्री पहाड़ियों में बसा, स्ट्राॅबेरी का एक प्रमुख उत्पादक केंद्र है, जो कई पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां के ज्यादातर लोग स्ट्राॅबेरी की खेती में लगे हुए हैं।

 
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