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मध्य प्रदेश से तूर दाल की उत्पत्ति के संकेत

वैज्ञानिकों ने अरहर या तूर दाल की उत्पत्ति से संबंधित एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन को ‘इंटरनेशनल क्राॅप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फाॅर सेमी-एरिड ट्राॅपिक्स’ (ICRISAT) द्वारा संपादित किया गया।

जिसने इस फसल के जीनोम को फिर से अनुक्रमित किया। इस अध्ययन में मध्य प्रदेश से इसकी उत्पत्ति की संभावना व्यक्त की गई है।

नौ संस्थानों के 19 वैज्ञानिकों की एक वैश्विक टीम ने नए लक्षणों यथा फसल को प्रभावित करने वाली विभिन्न बीमारियों के प्रति प्रतिरोधकता की भी खोज की है। ये निष्कर्ष 22 मई, 2017 को ‘नेचर जेनेटिक्स’ (Nature Genetics) नामक जर्नल में प्रकाशित किए गए। ICRISAT के अनुसंधान कार्यक्रम निदेशक राजीव के वार्शणेय द्वारा एक बयान में कहा गया कि यह सफलता इस फसल की बेहतर किस्मों को विकसित करने में मददगार होगी तथा किसानों के उत्पादन में वृद्धि करेगी।

उनके अनुसार इस अध्ययन में पुनःअनुक्रमित डेटा के इस्तेमाल द्वारा अनुकूलन तथा प्रजनन से प्रभावित तथा आनुवांशिक आधार को कम करने के उत्तरदायी, जीनोमिक क्षेत्रों (Genomic Regions) की पहचान की गई है। साथ ही पहली बार डीएनए स्तर पर फसल की आनुवंशिक उत्पत्ति की भी पहचान की गई है। ICRISAT के नेतृत्व में वैश्विक टीम द्वारा वर्ष 2011 में इसके डीएनए अनुक्रम को डीकोड किया गया था। प्रोटीन, फाइबर, निज और विटामिन का एक बड़ा स्रोत होने के बावजूद पिछले 6 दशकों में तूर या अरहर की पैदावार सीमित आनुवांशिक विविधता व अल्प जीनोम जानकारी के कारण स्थिर रही है। अब इसकी बेहतर किस्मों को विकसित करने की आवश्यकता है।

इस अनुसंधान में ‘स्कूल आॅफ एग्रीकल्चर एंड एनवायरनमेंट’ तथा ‘इंस्टिट्यूट आॅफ एग्रीकल्चर’ (यूनिवर्सिटी आॅफ वेस्टर्न आॅस्ट्रेलिया), ‘शेन्जेन मिलेनियम जीनोमिक्स’ (चीन), ‘प्रो. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय’ (हैदराबाद), ‘कृषि अनुसंधान केंद्र’ (कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, कर्नाटक), ‘विश्व-भारती’ (शांतिनिकेतन) तथा ‘इंटरनेशनल क्राॅप्स रिसर्च इंस्टी्यूट फाॅर सेमी-एरिड ट्राॅपिक्स’ (हैदराबाद) आदि ने भाग लिया।

 
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