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फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपतिः इमैन्युएल मैक्राॅन

फ्रांस के राजनीतिक परिदृश्य को पलटते हुए फ्रांसीसी मतदाताओं ने यूरोपीय संघ समर्थक तथा मध्यमार्गी नेता इमैन्युएल मैक्राॅन (Emmanuel Macron) को फ्रांस के राष्ट्रपति के तौर पर चुना।

वे फ्रांसीसी इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रपति हैं। 7 मई, 2017 को घोषित हुए इन चुनाव परिणामों में फ्रांस के मतदाताओं ने बड़े अंतर से मरीन ले पेन (Marine Le Pen) के ‘फ्रेंच फर्स्ट’ राष्ट्रवाद (French-first Nationalism) को नकार दिया। 39 वर्षीय पूर्व निवेश बैंकर मैक्रों फ्रांस के 25 वें राष्ट्रपति तथा फ्रांस के पांचवें गणराज्य (Fifth French Republic) के 8वें राष्ट्रपति होंगे। इसके पूर्व उन्होंने कभी कोई निर्वाचित पद नहीं संभाला।

चुनाव परिणामों के अनुसार एन मार्शे (En Marche!) पार्टी के श्री मैक्राॅन को 66.1% मत मिले जबकि फ्रंट नेशनल (En Marche!) पार्टी की सुश्री ले पेन को 33.9% मत प्राप्त हुए। चुनाव में कुल 75% लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। ज्ञात हो कि सुश्री ले पेन ने ब्रेक्जिट की तरह ही फ्रेक्जिट की बात की थी जिसे उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद आगे बढ़ाने की घोषणा की थी। यदि ले पेन यह चुनाव जीत जातीं तो यूरोपीय संघ के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता।

चुनाव जीतने के बाद मैक्राॅन ने कहा कि यह फ्रांस के लिए नए ‘उम्मीदों और विश्वास से भरे’ अध्याय की शुरुआत है, बेहद कम राजनीतिक अनुभव रखने वाले 39 वर्षीय मैक्राॅन फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति होंगे। मैक्राॅन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहले ऐसे नेता हैं जो फ्रांस के दो प्रमुख दलों- वामपंथी सोशलिस्ट (Socialists) और सेंटर राइट कन्जर्वेटिव रिपब्लिकन पार्टी (Conservative Republicans) से नहीं हैं। वे निवर्तमान राष्ट्रपति ओलांदे के कार्यकाल में दो वर्ष आर्थिक मंत्री के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव की निर्णायक दौड़ में मैक्राॅन की धुर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी रहीं मरीन ले पेन को मतदाताओं ने बड़े अंतर से खारिज कर दिया, जिससे देश की ‘पहली महिला राष्ट्रपति’ बनने का उनका स्वप्न पूरा नहीं हो पाया। मैक्राॅन जहां फ्रांस को आगे ले जाने के लिए एक खुली और प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था बनाने के पक्षधर हैं वहीं ले पेन सीमाओं को बंद कर फ्रांस के कामगारों को रोकना चाहती थीं, साथ ही वे यूरोपीय संघ की समान मुद्रा से अलग होने और व्यापार समझौतों को खत्म करने की पक्षधर भी हैं।

नेपोलियन के बाद, फ्रांस के सबसे कम उम्र के नेता के रूप में 14 मई, 2017 को कार्यालय संभालने के बाद, मैक्राॅन को जून के संसदीय चुनाव में बहुमत प्राप्त करने की तत्काल चुनौती का सामना करना पड़ेगा ताकि राज्य खर्च में कमी, उच्च निवेश तथा कर, श्रम व पेंशन तंत्र में सुधार से सम्बंधित उनकी योजनाएं लागू की जा सकें। श्री इमैनुएल मैक्राॅन ने काॅर्पाेरेट करों में 33 से 25ः तक की कटौती का वादा किया है तथा वे 50 अरब यूरो के सार्वजनिक निवेश योजना के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। वे सीरिया में असद शासन को बदलने, यूक्रेन के मामले में रूस के खिलाफ प्रतिबंध तथा रक्षा खर्च को जीडीपी के 2ः तक करने के भी समर्थक रहे हैं।

बताते चलें कि फ्रांस के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास का नाम एलिसी पैलेस (Elysee Palace) है। जर्मनी तथा यूनाइटेड किंगडम के बाद फ्रांस यूरोपीय संघ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। फ्रांस की संसद के दो सदन हैं, ऊपरी सदन का नाम सीनेट तथा निचले सदन का नाम नेशनल असेंबली है। सीनेट में सदस्यों की संख्या 348 तथा नेशनल असेंबली में सदस्यों की संख्या 577 है।

उल्लेखनीय है की पदभार ग्रहण करने के एक दिन बाद 15 मई, 2017 को मैक्राॅन ने अपनी राजनीतिक अपील को व्यापक करने तथा जून में विधायी चुनावों से पहले अपने विरोधियों को कमजोर करने के लिए प्रधानमंत्री पद हेतु रिपब्लिकन नेता एडुआर्डाे फिलिप (Edouardo Philippe) के नाम की घोषणा की।

इसके अतिरिक्त फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुल मैक्राॅन ने अपने वायदे के अनुसार अपने कैबिनेट में आधे पदों पर महिलाओं की नियुक्ति की। कैबिनेट के 22 में से 11 पदों पर महिलाएं हैं, जिसमें सिल्वी गोलार्ड को रक्षा मंत्री बनाया गया है।

 
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