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एनालिसिस 100

जैव प्रौद्योगिकी सूचना नेटवर्क

जीव विज्ञान अनुसंधान, उद्योग और जीव विज्ञान के अज्ञात क्षेत्रों में जैव सूचना प्रौद्योगिकी अत्‍यधिक महत्‍व रखता है। अत्‍यधिक ज्ञान और गहन पूंजी के तौर पर जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान ने इस दशक में अत्‍यधिक सूचनाओं का सृजन किया है। इस जानकारी का प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए एक त्‍वरति और व्‍यापक बेंडविड्थ नेटवर्क की आवश्‍यकता होती है। इस दिशा में, जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने बॉयोग्रिड इंडिया के नाम से एक वर्चुअल पब्‍लि‍क नेटवर्क (वीपीएन) के तौर पर एक अत्‍यधिक तीव्र गति और हाई- बेंडविड्थ नेटवर्क की स्‍थापना करने में सफलता प्राप्‍त की। इसके पहले चरण में 11 नोड्स की स्‍थापना की जा चुकी है, जो सक्रिय रूप से देश में मानव संसाधन विकास और जैव सूचना विज्ञान में अनुसंधान और विकास के अलावा जैव प्रौद्योगिकी सूचना के प्रसार जैसी जैव सूचना विज्ञान गतिविधियों को प्रोत्‍साहन दे रहे हैं। इससे भारत में एकमात्र सांझा नेटवर्क स्रोत, बीटीआईएस की उपयोगिता और महत्‍व को बढ़ाने में मदद मिलती है।

 

संक्षेप में बीटीआईएस-नेट

बीटीआईएस-नेट देश में सक्षम मानव संसाधनों और बुनियादी विशिष्‍ट सुविधाओं से युक्‍त 165 से ज्‍यादा संस्‍थाओं का एक मजबूत वैज्ञानिक नेटवर्क है जो जैव सूचना विज्ञान और संगणना जीव विज्ञान में गहन अनुसंधान को अंजाम देता है। बीटीआईएस-नेट पर वर्तमान में 100 से ज्‍यादा विषयों के विशेष आंकड़े उपलब्‍ध है।

बीटीआईएस-नेट  के सभी केन्‍द्र एक नेटवर्क से जुड़े हैं और अब उनमें से कुछ की नेटवर्किंग राष्‍ट्रीय ज्ञान आयोग के माध्‍यम से की जा रही है। आठ नये केन्‍द्रों को भी बीटीआईएस-नेट से जोड़ा गया है। पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में 27 जैव सूचना विज्ञान केन्‍द्रों से युक्‍त एनईबीआई-नेट ने देश के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए जैव प्रौ़द्योगिकी में व्‍यापक अवसरों के मार्ग खोल दिये हैं। इस नेटवर्क के माध्‍यम से, जैव प्रौद्योगिकी केन्‍द्र और विदेशी सहयोगी केन्‍द्र जैसे कार्यक्रमों का निर्माण और कार्यान्‍वयन अधिक सरल हो गया है। चावल और आम में जैव प्रौद्योगिकी पर दो प्रमुख परियोजनाओं के अलावा स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में  तपेदि‍क (टीबी) पर अनुसंधान की एक परियोजना ने पिछले वर्ष के दौरान शानदार प्रगति देखने को मिली।

 

उत्‍कृष्‍टता के केन्‍द्र

बीटीआईएस-नेट के एक अंग के तौर पर जैव सूचना विज्ञान और संगणना जीव विज्ञान में उत्‍कृष्‍टता के छह केन्‍द्र स्‍थापित किये जा चुके हैं। ये केन्‍द्र अनुसंधान में सहायता के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित हैं। प्रत्‍येक केन्‍द्र पर चिन्‍हित किये गये महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में आकड़ों को वि‍कसि‍त करने का दायि‍त्‍व है। इनमें से कुछ प्रयासों को अंतर्राष्‍ट्रीय पहचान भी मिल चुकी है।  कोलकाता के बोस संस्‍थान स्थित सीओई को जीनोम विश्‍लेषण, रेगुलेटरी आरएनए स्‍टेम सेल, जीनोमिक्‍स और संरचनात्‍मक जैव सूचना विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल है। नई दिल्‍ली के जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय स्थित केन्‍द्र भी मानव संसाधन विकास के उद्देश्‍यों के साथ जैव सूचना विज्ञान और संगणना जीव विज्ञान तथा तंत्र जीव विज्ञान जैसे अग्रणीय क्षेत्रों में महत्‍वपूर्ण रूप से कार्य कर रहा है। इसके अलावा मदुरई के मदुरई कामराज विश्‍वविद्यालय तथा पुणे विश्‍वविद्यालय स्थित केन्‍द्रों पर भी जैव सूचना प्रौद्योगिकी में एमएससी पाठ्यक्रमों को चलाया जा रहा है।

 

अनुसंधान एवं विकास

जैव सूचना विज्ञान केन्‍द्रों का मेज़मानो और पड़ोसी संस्‍थानों के द्वारा भी गहन अध्‍ययन के लिए व्‍यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा जैव सूचना विज्ञान केन्‍द्रों में वैज्ञानिक ज़ीन विश्‍लेषण, प्रोटीन संरचना और अभियांत्रिकी, जीव विज्ञान में अनुसंधान, पेप्‍टाइड वैक्सीन के लिए उपकरण, आकड़ों को खोजने के लिए नये उपकरण आदि में अनुसंधान कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान विभाग भी जैव सूचना विज्ञान और बॉयोग्रिड पर दीर्घावधि शिक्षण कार्यक्रमों में मदद प्रदान कर रहा है। इन कार्यक्रमों में जैव सूचना विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के लिए कक्षाओं में वीडियों वार्तालाप के माध्‍यम से व्‍याख्‍यान देने की सुविधायें हैं। बॉयोग्रिड पर प्रोटीन डाटा बैंक (पीडीबी), प्‍लांट जीनो डाटा बैंक, डाटाबेस ऑफ यूरोपियन बॉयोइन्‍फोर्मेटिक्‍स इंस्‍टीट्यूट ( ईबीआई) और पब्लिक डोमेन बॉयोफॉमेटिक्‍स साफ्टवेयर पैकैजिज़ जैसे अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यताप्राप्‍त जेनोमिक डाटा-बेस भी उपलब्‍ध हैं। भारत में पूरी तरह से स्‍थापित इन डाटाबेसों की उपलब्‍धता से प्राथमिक और द्वितीय सूचना स्रोतों से उच्‍च स्‍तर के आंकड़ें प्रदान किये जाते हैं। बीटीआईएस नेटवर्क जैव प्रौद्योगिकी और जैव सूचना विज्ञान में अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण ज्ञान मार्ग के रूप में कार्य करेगा।        

 

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